Ruby Gemstone: माणिक्य रत्न पहनने के लाभ और धारण करने की विधि

रत्न-परिचय ग्रंथ में नवग्रहों से संबंधित रत्नों की जानकारी दी गई है, जिसमें माणिक्य रत्न विशेष रूप से उल्लेखित है। यह रत्न सूर्य देव का रत्न है और इसे धारण करने
रत्न-परिचय ग्रंथ में नवग्रहों से संबंधित रत्नों की जानकारी दी गई है, जिसमें माणिक्य रत्न विशेष रूप से उल्लेखित है। यह रत्न सूर्य देव का रत्न है और इसे धारण करने से व्यक्ति की नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और करियर में उन्नति के योग बनते हैं। इसके अलावा, माणिक्य रत्न कई रोगों से भी बचाव करता है।
यदि किसी जातक के जन्म के समय सूर्य अनिष्टकारी हो, तो माणिक्य रत्न धारण करना लाभकारी माना जाता है। विशेष रूप से सिंह राशि के जातकों के लिए यह रत्न अत्यंत लाभकारी है। इसके अलावा, मेष और धनु राशि के जातकों के लिए भी माणिक्य धारण करना फायदेमंद होता है।
आयुर्वेद शास्त्रों के अनुसार, माणिक्य रत्न धारण करने से वात, पित्त और कफ तीनों तत्वों को संतुलित किया जा सकता है। यह रत्न चक्षु रोग, क्षयरोग, उदरशूल, फोडा और घावों में भी लाभकारी होता है।
माणिक्य रत्न को धारण करने के लिए जातक को अपनी जन्म मास की 1, 10, 16 या 28 तारीख, रविवार या जनवरी, मार्च, मई, जुलाई, अगस्त, सितंबर, अक्टूबर या दिसंबर में इसे पहनना चाहिए। इसे कम से कम 3 रत्ती का होना चाहिए और इसे सोने की धातु में बनवाकर अनामिका अंगुली में पहनना चाहिए।



















