TMC controversy continues: ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से जल्द फैसला मांगा, ऋतब्रत गुट ने अब तक जवाब क्यों नहीं दिया?

तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) में चल रहे विवाद के बीच, पार्टी की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से अपील की है कि वह इस मामले की जांच जल्द पूरी करें। उन्होंने आयो
तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) में चल रहे विवाद के बीच, पार्टी की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से अपील की है कि वह इस मामले की जांच जल्द पूरी करें। उन्होंने आयोग को एक नया पत्र भेजा है जिसमें कहा गया है कि उनके गुट ने निर्धारित समय के भीतर अपना जवाब पेश कर दिया था, जबकि ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट दो बार समय बढ़ाने के बावजूद अब तक कोई जवाब नहीं दे सका है। ममता बनर्जी ने इस मामले में और देरी न करने की आवश्यकता पर जोर दिया है, क्योंकि यह पश्चिम बंगाल की राजनीति पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऋतब्रत बनर्जी और उनके सहयोगी अतिरिक्त समय का उपयोग अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए नए और गलत साक्ष्य तैयार करने में कर रहे हैं। ममता ने कहा कि उनके गुट ने पहले ही प्रतिद्वंद्वी पक्ष के आरोपों का मजबूती से खंडन किया है और उन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। इसलिए, अब और समय देना उचित नहीं होगा।
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से कहा कि दोनों पक्षों को समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि 25 जुलाई के बाद प्रतिद्वंद्वी गुट को कोई और समय नहीं दिया जाए। उनके अनुसार, यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़ा हुआ है और इसमें जल्द निर्णय लेना आवश्यक है। उन्होंने पत्र में लिखा कि न्याय तभी प्रभावी माना जाएगा जब लोगों का उस पर भरोसा बना रहे। यदि बार-बार समय बढ़ाया जाएगा, तो इससे लोगों का भरोसा कमजोर होगा। यह विवाद 2 जुलाई को चुनाव आयोग के पास पहुंचा, जब ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने खुद को तृणमूल कांग्रेस का 'वास्तविक' संगठन बताते हुए आयोग से मान्यता देने की मांग की। इस गुट का दावा है कि 22 जून को आयोजित विशेष बैठक में संगठनात्मक बदलाव किए गए थे। इसके बाद चुनाव आयोग ने 2 जुलाई को दोनों पक्षों को पत्र भेजकर 6 जुलाई शाम 5:30 बजे तक जवाब मांगा था।
ममता बनर्जी गुट ने समय पर अपना जवाब दाखिल कर दिया, जबकि ऋतब्रत बनर्जी गुट ने पहले 10 जुलाई और फिर 25 जुलाई तक समय मांगा। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने अपने जवाब में प्रतिद्वंद्वी गुट के सभी दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। गुट ने कहा कि एआईटीसी के संविधान के अनुसार पार्टी की सभी संगठनात्मक समितियां वर्ष 2027 तक वैध हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आखिरी संगठनात्मक चुनाव वर्ष 2022 में हुए थे। इसलिए, यह दावा कि समितियों का कार्यकाल 2025 में समाप्त हो गया, तथ्यात्मक और कानूनी रूप से सही नहीं है। इस प्रकार, ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से मामले को जल्द निपटाने की अपील की है ताकि पश्चिम बंगाल की राजनीति में स्थिरता बनी रहे।


















