Climate Change and Flash Floods: भारत में अचानक बाढ़ के मामलों में वृद्धि का कारण

हिमाचल प्रदेश में व्यास नदी का उफान, 2013 की केदारनाथ त्रासदी, 2023 में सिक्किम की ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (glof) और असम में दशकों में आई विनाशकारी बाढ़ जैस
हिमाचल प्रदेश में व्यास नदी का उफान, 2013 की केदारनाथ त्रासदी, 2023 में सिक्किम की ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) और असम में दशकों में आई विनाशकारी बाढ़ जैसी घटनाएं पिछले कुछ वर्षों में भारत में लगातार बढ़ी हैं। इन सभी घटनाओं में एक समान बात यह है कि इन सभी में बहुत कम समय में अत्यधिक वर्षा हुई, जिससे नदियां, नाले और ड्रेनेज सिस्टम उसका दबाव नहीं झेल सके।
वैज्ञानिकों का मानना है कि हर फ्लैश फ्लड के लिए केवल जलवायु परिवर्तन जिम्मेदार नहीं होता। स्थानीय भूगोल, नदियों का स्वरूप, शहरीकरण और मानव गतिविधियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (IPCC) की Sixth Assessment Report (AR6) स्पष्ट करती है कि बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण अत्यधिक वर्षा की घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ रही है। इसी कारण भारत अब अधिक बार अचानक आने वाली बाढ़ का सामना कर रहा है।
फ्लैश फ्लड को समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि बढ़ता तापमान बारिश को कैसे प्रभावित करता है। वायुमंडलीय विज्ञान का Clausius-Clapeyron Relation बताता है कि तापमान में हर 1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि पर हवा लगभग 7 प्रतिशत अधिक जलवाष्प धारण कर सकती है। जब वातावरण में नमी अधिक होती है, तो बादलों में भी पानी की मात्रा बढ़ जाती है। IPCC AR6 के अनुसार यही अतिरिक्त नमी कई क्षेत्रों में कम समय में अत्यधिक बारिश का कारण बन रही है।
भारत का मानसून हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से मिलने वाली नमी पर निर्भर करता है। Indian Institute of Tropical Meteorology (IITM) पुणे के अध्ययनों में बताया गया है कि हाल के दशकों में अरब सागर तेजी से गर्म हुआ है। गर्म समुद्री सतह वातावरण में अधिक नमी और ऊर्जा उपलब्ध कराती है, जिससे कम दबाव वाले सिस्टम अधिक सक्रिय हो सकते हैं। यही सिस्टम जब तटीय या पर्वतीय इलाकों में पहुंचते हैं, तो कम समय में अत्यधिक बारिश करा सकते हैं।



















