Unique Yellow Palash Tree in Madhya Pradesh: पीले पलाश के वृक्ष के संरक्षण की चुनौती

मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित पीले पलाश का एकमात्र वृक्ष संकट में है। यह वृक्ष राष्ट्रीय राजमार्ग 135 बीजी के निर्माण कार्य के कारण खतरे में पड़ गया है। इस
मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित पीले पलाश का एकमात्र वृक्ष संकट में है। यह वृक्ष राष्ट्रीय राजमार्ग 135 बीजी के निर्माण कार्य के कारण खतरे में पड़ गया है। इस फोरलेन का निर्माण चित्रकूट से मझगवां होते हुए सतना शहर तक किया जा रहा है, जिससे अयोध्या तक यात्रा आसान होगी। लेकिन इस निर्माण कार्य के चलते चितहरा मोड़ के पास स्थित इस दुर्लभ वृक्ष को हटाने की योजना बनाई जा रही है। वनस्पति विज्ञानियों का मानना है कि यदि इसे स्थानांतरित किया गया तो इसकी जीवित रहने की संभावना बहुत कम है। इसके अलावा, हाल ही में कृषि विज्ञान केंद्र मझगवां में पीले पलाश के बीजों से नए पौधे तैयार किए गए थे, लेकिन उनमें फूल नहीं आए, जिससे वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है।
इस पेड़ के संरक्षण के लिए दीनदयाल शोध संस्थान ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। वैज्ञानिकों का सुझाव है कि इस पेड़ को बचाने के लिए मुख्यमंत्री को देश-विदेश के विशेषज्ञों से सहायता लेनी चाहिए। वनमंडल अधिकारी मंयक चांदीवाल ने बताया कि वृक्ष को ट्रांसलोकेट करने की तैयारी की गई है, लेकिन इस प्रक्रिया में वृक्ष के जीवित रहने की संभावना केवल 40-50 प्रतिशत है। इस समस्या के समाधान के लिए जबलपुर स्थित राज्य वन अनुसंधान संस्थान (एसएफआरआइ) की चार सदस्यीय टीम ने शोध किया है और कुछ सुझाव दिए हैं।



















