Tiger Population Increase: मानव-वन्यजीव संघर्ष में बढ़ोतरी का कारण

कार्बेट टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या में निरंतर वृद्धि ने अब उन्हें नए क्षेत्रों में पहुंचाने का काम किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि रिजर्व की सीमित धारण
कार्बेट टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या में निरंतर वृद्धि ने अब उन्हें नए क्षेत्रों में पहुंचाने का काम किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि रिजर्व की सीमित धारण क्षमता और भोजन के लिए बढ़ते दबाव के कारण बाघ अब मैदानी इलाकों के साथ-साथ पहाड़ी क्षेत्रों में भी पहुंच रहे हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में तेजी आई है। सेवानिवृत्त डीएफओ बलवंत सिंह शाही के अनुसार, वर्ष 1973 में कार्बेट में बाघों की संख्या लगभग 40 थी, जो कि 2022 में बढ़कर 266 हो गई। हर गणना में बाघों की संख्या में वृद्धि को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि अगली गणना में भी यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि नर बाघ अपने क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए कई किलोमीटर तक विचरण करते हैं। जब उन्हें पर्याप्त शिकार नहीं मिलता, तो वे नए इलाकों की ओर बढ़ने लगते हैं। यही कारण है कि अब अल्मोड़ा के बिनसर, जागेश्वर और बागेश्वर के सुंदरढूंगा क्षेत्र में बाघों की मौजूदगी देखी जा रही है।
बाघों की बढ़ती संख्या के साथ-साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में भी वृद्धि हो रही है। जब बाघ नए क्षेत्रों में प्रवेश करते हैं, तो यह स्थानीय निवासियों के लिए खतरा बन जाता है। बाघों का भोजन की तलाश में विचरण करना और मानव बस्तियों के करीब आना, दोनों ही स्थितियों में संघर्ष की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इससे न केवल मानव जीवन को खतरा होता है, बल्कि बाघों के लिए भी यह स्थिति खतरनाक हो सकती है। यदि बाघों को मानव बस्तियों के करीब देखा जाता है, तो स्थानीय लोग उन्हें मारने का प्रयास कर सकते हैं, जिससे बाघों की संख्या में कमी आ सकती है।



















