Stem Cell Research Breakthrough: डेहरी की बेटी डॉ. रीना सिंह ने डायबिटीज के स्थायी इलाज की नई उम्मीद जगाई

डेहरी ऑन सोन (रोहतास)। स्थानीय जेएलएन कॉलेज के पूर्व प्राध्यापक प्रो. कामेश्वर सिंह की पुत्री एवं डेहरी की बेटी डॉ. रीना सिंह ने स्टेम सेल रिसर्च के क्षेत्र में
डेहरी ऑन सोन (रोहतास)। स्थानीय जेएलएन कॉलेज के पूर्व प्राध्यापक प्रो. कामेश्वर सिंह की पुत्री एवं डेहरी की बेटी डॉ. रीना सिंह ने स्टेम सेल रिसर्च के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। उनके शोध कार्य ने टाइप-वन डायबिटीज तथा नवजात शिशुओं में होने वाले जन्मजात हृदय रोगों के उपचार की दिशा में नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। चिकित्सा विज्ञान के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में उनकी उपलब्धियां न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय हैं। डॉ. रीना सिंह की प्रारंभिक शिक्षा डेहरी ऑन सोन के केसरस्वती विद्या मंदिर तथा मॉडल स्कूल में हुई। डॉ. रीना ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), वाराणसी से रसायन विज्ञान में बीएससी (Hons) तथा मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से बायोटेक्नोलॉजी में एमएससी की। उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता का ही परिणाम था कि उन्हें जर्मनी के प्रतिष्ठित हनोवर मेडिकल स्कूल के मॉलिक्यूलर मेडिसिन एमडी-पीएचडी कार्यक्रम में वैश्विक स्तर पर चौथी रैंक प्राप्त हुई। यहां उन्होंने डेवलपमेंटल बायोलॉजी में विशेषज्ञता हासिल करते हुए हृदय के विकास और जन्मजात हृदय विकृतियों पर गहन शोध किया। उनके इस शोध कार्य पर आधारित तीन महत्वपूर्ण शोधपत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए, जिन्हें वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय ने सराहा। पीएचडी पूरी करने के बाद डॉ. रीना ने जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया में पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च की तथा सिडनी विश्वविद्यालय में लेक्चरर के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। स्टेम सेल आधारित चिकित्सा और टाइप-वन डायबिटीज पर उनके उत्कृष्ट शोध को देखते हुए ऑस्ट्रेलिया सरकार ने उन्हें 'राइजिंग स्टार' और 'फ्यूचर लीडर' जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया। वर्तमान में डॉ. रीना सिंह बेंगलुरु स्थित जैव प्रौद्योगिकी विभाग में रीडर एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत हैं। उनका शोध मुख्य रूप से स्टेम सेल तकनीक के माध्यम से टाइप-वन डायबिटीज का स्थायी उपचार विकसित करने पर केंद्रित है। उनका मानना है कि यदि इस तकनीक के जरिए मधुमेह का स्थायी इलाज संभव हो जाता है, तो दुनिया भर के लाखों मरीजों को जीवनभर इंसुलिन पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और उनके जीवन की गुणवत्ता में क्रांतिकारी सुधार आएगा। अपनी सफलता के बावजूद डॉ. रीना अपनी जड़ों से गहराई से जुड़ी हुई हैं। वे कहती हैं कि इस मिट्टी ने मुझे गढ़ा है और इसका कर्ज मुझ पर है। अपने देश और समाज के लिए काम करना मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता है। डॉ. रीना के पति डॉ. शशिकांत सिंह, जो डालमियानगर के सिधौली के निवासी हैं, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी सिडनी के पूर्व छात्र, फिजियोथेरेपिस्ट एवं हेल्थ पॉलिसी विशेषज्ञ हैं। वे वर्तमान में डेहरी ऑन सोन में एक रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आर एंड डी) संस्थान स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय युवाओं को उच्चस्तरीय वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार से जोड़ना तथा क्षेत्र में शोध संस्कृति को बढ़ावा देना है।



















