Rare minerals map shines in Bhagalpur: बटेश्वरस्थान की पहाड़ियों में मिला खजाना, EV व रक्षा तकनीक का बनेगा केंद्र

भागलपुर, जो उत्तरवाहिनी गंगा की अविरल धारा और बाबा बटेश्वरनाथ की आध्यात्मिक आभा के लिए जाना जाता है, अब धरती की गहराइयों में छिपी दुर्लभ खनिज संपदा के लिए भी प्
भागलपुर, जो उत्तरवाहिनी गंगा की अविरल धारा और बाबा बटेश्वरनाथ की आध्यात्मिक आभा के लिए जाना जाता है, अब धरती की गहराइयों में छिपी दुर्लभ खनिज संपदा के लिए भी प्रसिद्ध होने जा रहा है। खगलगांव-पीरपैंती क्षेत्र का बटेश्वरस्थान, जहां सदियों से 'हर-हर महादेव' का जयघोष गूंजता रहा है, अब इन पहाड़ियों के गर्भ में छिपे रेयर अर्थ एलिमेंट्स (Rare Earth Elements - REE) भारत के तकनीकी और औद्योगिक भविष्य की नई इबारत लिखने की तैयारी में है। प्रारंभिक सर्वेक्षणों में बटेश्वरस्थान की करोड़ों वर्ष पुरानी चट्टानों में लैंथेनम, सेरियम, टाइटेनियम, क्रोमाइट और अन्य अति-दुर्लभ खनिजों की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकार की खनन एजेंसियों ने इस क्षेत्र में जी-1 (G-1) स्तर का विस्तृत वैज्ञानिक अन्वेषण शुरू कर दिया है। भूवैज्ञानिकों का मानना है कि इन चट्टानों में छिपी यह प्राकृतिक धरोहर केवल सामान्य धातुएं नहीं हैं, बल्कि यह आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहन (EV), सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरण, अंतरिक्ष (एयरोस्पेस) तकनीक और हरित ऊर्जा (Green Energy) का आधार बनने वाली हैं।
यदि जी-1 अन्वेषण में इन खनिजों का पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण भंडार प्रमाणित हो जाता है, तो भागलपुर की पहचान केवल सिल्क सिटी, गंगा और विक्रमशिला तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह देश के क्रिटिकल मिनरल मैप पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा। जिला खनन पदाधिकारी कुमार रविशंकर ने बताया कि बटेश्वरस्थान क्षेत्र में जी-1 स्तर का विस्तृत अन्वेषण जारी है। इस चरण में खनिज की मात्रा, गुणवत्ता, गहराई और आर्थिक उपयोगिता का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाता है। रिपोर्ट के आधार पर भारतीय खनिज ब्यूरो (IBM) के मानकों के अनुसार संसाधनों का सटीक आकलन होगा। पर्याप्त भंडार प्रमाणित होने के बाद ही नीलामी और आगे की वैधानिक प्रक्रिया शुरू होगी।



















