Efforts to Save Illahabadi Guava: इलाहाबादी 'सुर्खा' व 'सफेदा' अमरूद की साख बचाने की तैयारी, फ्यूजीकांट फंगस रोग पर लगाएगा अंकुश

प्रयागराज में इलाहाबादी अमरूद की पहचान देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी है। इस विशेष प्रकार के अमरूद की साख को बनाए रखने के लिए लखनऊ स्थित केंद्रीय उपोष्ण बागव
प्रयागराज में इलाहाबादी अमरूद की पहचान देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी है। इस विशेष प्रकार के अमरूद की साख को बनाए रखने के लिए लखनऊ स्थित केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमान खेड़ा ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। इस पहल के तहत प्रयागराज और कौशांबी के 10-10 बागवानों को चिह्नित किया गया है, जिनकी बागवानी की निगरानी अगले एक वर्ष तक विशेषज्ञ करेंगे। इस कार्य का उद्देश्य बागवानों को उकठा रोग से बचाना और उनकी फसल को सुरक्षित रखना है। इस प्रकार की बागवानी प्रयागराज के भगवतपुर और कौशांबी के चायल, मूरतगंज जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर होती है। हालांकि, उचित देखभाल के अभाव और उकठा रोग के प्रभाव के कारण इन बागों की स्थिति बिगड़ रही है। इस समस्या का समाधान करने के लिए केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान ने इस पहल की शुरुआत की है।
इस पहल की शुरुआत प्रयागराज स्थित औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र खुसराबाग से की जाएगी। संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. केके श्रीवास्तव इस परियोजना पर काम करेंगे। उन्होंने खुसराबाग केंद्र के प्रभारी विजय किशोर सिंह के साथ मिलकर बागों का निरीक्षण किया। डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि फ्यूजेरियम आक्सीस्पोरम नामक फंगस इलाहाबादी अमरूद की बागवानी को बर्बाद कर रहा है। इस फंगस के कारण बागवानों को काफी नुकसान हो रहा है, और इसलिए इसे नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। इसके लिए विशेषज्ञों की एक टीम बागवानों को उचित तकनीक और देखभाल के तरीकों से अवगत कराएगी।



















