Innovative Use of Banana Stems: भागलपुर के 'बनाना ब्वाय' ने किया कमाल का अविष्कार

भागलपुर जिले के ध्रुवगंज गांव के निवासी गोपाल जी ने केले के तने से उच्च गुणवत्ता का सेल्यूलोज विकसित करने का एक अनोखा तरीका खोज निकाला है। यह अविष्कार न केवल कि
भागलपुर जिले के ध्रुवगंज गांव के निवासी गोपाल जी ने केले के तने से उच्च गुणवत्ता का सेल्यूलोज विकसित करने का एक अनोखा तरीका खोज निकाला है। यह अविष्कार न केवल किसानों की आय को बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि कृषि अपशिष्ट की समस्या का भी समाधान करेगा। गोपाल जी, जो वर्तमान में फरीदाबाद में रह रहे हैं, ने जेईई ओरिजिन प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की है और 'बनाना ब्वाय ऑफ इंडिया' के नाम से मशहूर हो गए हैं। उनका दावा है कि इस नवाचार के माध्यम से केले के तनों का औद्योगिक उपयोग संभव है, जो मेडिकल, स्वच्छता और पर्यावरण-अनुकूल उद्योगों के लिए एक नया विकल्प प्रस्तुत करेगा। गोपाल जी ने बताया कि उन्होंने इस तकनीक के लिए पेंटेट का आवेदन किया है, जिससे इसे औपचारिक मान्यता मिल सके।
बिहार के नवगछिया क्षेत्र में केले की खेती बड़े पैमाने पर होती है, और यहां के किसान अक्सर बाढ़, आंधी-तूफान या फसल कटाई के बाद केले के बेकार तनों के निस्तारण की समस्या का सामना करते हैं। गोपाल जी का मानना है कि यदि उनकी तकनीक को बड़े स्तर पर लागू किया जाता है, तो इन तनों की खरीद किसानों से की जाएगी। इससे न केवल खेतों में पड़े कृषि अवशेषों की समस्या का समाधान होगा, बल्कि किसानों को एक अतिरिक्त आय का स्रोत भी मिलेगा। गोपाल जी ने कहा कि केले के तने से विकसित सेल्यूलोज का उपयोग भविष्य में सैनिटरी पैड, बेबी डायपर, एडल्ट डायपर और अन्य मेडिकल उत्पादों के निर्माण में किया जा सकेगा।



















