Maharashtra: पुणे-नासिक रेल लाइन का GMRT पर कितना असर, परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व अध्यक्ष करेंगे आकलन

महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने बुधवार को एक उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है, जिसका उद्देश्य पुणे-नासिक सेमी-हाई-स्पीड रेलवे लाइन के जाइंट मीटरवेव रेडियो ट
महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने बुधवार को एक उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है, जिसका उद्देश्य पुणे-नासिक सेमी-हाई-स्पीड रेलवे लाइन के जाइंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप (जीएमआरटी) पर प्रभाव का मूल्यांकन करना है। इस समिति की अध्यक्षता परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व अध्यक्ष अनिल काकोडकर करेंगे। यह निर्णय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर लिया गया है, और सरकार ने समिति के गठन का सरकारी संकल्प भी जारी किया है। रेलवे लाइन की प्रारंभिक संरेखण जीएमआरटी के करीब खोडाड क्षेत्र में थी, जिससे इस क्षेत्र में संभावित प्रभावों की चिंता जताई गई है। इसके अलावा, परमाणु ऊर्जा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभागों ने बिजली ट्रेनों के कारण विद्युत चुम्बकीय हस्तक्षेप की आशंका भी व्यक्त की है। जीएमआरटी विश्व की प्रमुख कम-आवृत्ति रेडियो खगोल विज्ञान वेधशालाओं में से एक है, और इसका प्रभाव इस नई रेलवे लाइन पर महत्वपूर्ण हो सकता है।
समिति का मुख्य कार्य दोनों प्रस्तावित मार्गों के विद्युत चुम्बकीय, परिचालन और संरचनात्मक प्रभावों की जांच करना है। यह समिति सुरंग, एलिवेटेड संरचनाओं या सीमित पुनर्संरेखण जैसे विकल्पों का भी आकलन करेगी। जीएमआरटी के संचालन पर रेलवे लाइन के संभावित प्रभावों का मूल्यांकन करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह खगोल विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अनुसंधान कार्यों के लिए आवश्यक है। समिति को 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट महाराष्ट्र सरकार को सौंपनी है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि रेलवे परियोजना का कार्यान्वयन वैज्ञानिक और तकनीकी दृष्टिकोण से सुरक्षित हो।



















