28 Crore Indians in Debt: क्या EMI बन रही है नई लाइफस्टाइल?

भारत में घर, गाड़ी, और मोबाइल के लिए लोन लेना अब पहले से कहीं आसान हो गया है। इसके चलते करोड़ों भारतीय किसी न किसी प्रकार की emi चुका रहे हैं। यह स्थिति इस बात
भारत में घर, गाड़ी, और मोबाइल के लिए लोन लेना अब पहले से कहीं आसान हो गया है। इसके चलते करोड़ों भारतीय किसी न किसी प्रकार की EMI चुका रहे हैं। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि क्या भारतीयों की जिंदगी धीरे-धीरे EMI पर निर्भर होती जा रही है।
जनसत्ता की स्पेशल सीरीज 'आंकड़े बोलते हैं' में आज हम Equated Monthly Instalment (EMI) के प्रभाव पर चर्चा करेंगे, जिसने न केवल मिडिल क्लास बल्कि लोअर मिडिल क्लास को भी अपने जाल में फंसा लिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, मार्च 2025 तक देश में 28 करोड़ से अधिक यूनिक व्यक्तिगत उधारकर्ता हैं, यानी 28 करोड़ से ज्यादा भारतीयों ने किसी न किसी प्रकार का औपचारिक कर्ज लिया है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की Financial Stability Report 2026 के अनुसार, सितंबर 2025 तक भारत का Household Debt GDP के 45.5% तक पहुंच गया है। कुछ साल पहले यह अनुपात काफी कम था, जिससे स्पष्ट है कि घरेलू उधारी लगातार बढ़ रही है। RBI का कहना है कि 58.4% Household Borrowings अब Non-Housing Retail Loans हैं।
RBI और क्रेडिट ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि भारत में औपचारिक क्रेडिट तक पहुंच तेजी से बढ़ी है। 2017 में करीब 35% क्रेडिट-योग्य आबादी ने औपचारिक कर्ज लिया था, जबकि मार्च 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 74% हो गया। इसका मतलब है कि बैंक और NBFC पहले की तुलना में कहीं अधिक लोगों तक पहुंच रहे हैं।



















