Understanding Upper Layer NBFC: RBI's Regulations Explained

टाटा संस जैसी देश की सबसे बड़ी कॉर्पोरेट होल्डिंग कंपनी को भारतीय रिजर्व बैंक (rbi) द्वारा 'अपर लेयर एनबीएफसी' (nbfc - upper layer) के रूप में वर्गीकृत किए जाने
टाटा संस जैसी देश की सबसे बड़ी कॉर्पोरेट होल्डिंग कंपनी को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा 'अपर लेयर एनबीएफसी' (NBFC - Upper Layer) के रूप में वर्गीकृत किए जाने के बाद यह शब्द अचानक सुर्खियों में आ गया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब कोई नॉन-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) साइज, इंपैक्ट और वित्तीय ताकत में देश के बड़े-बड़े बैंकों के बराबर पहुंच जाती है, तो आरबीआई उस पर कैसे नकेल कसता है? आखिर क्या होती है 'अपर लेयर एनबीएफसी' (NBFC-UL), आरबीआई ने इसके लिए इतने चौंकाने वाले और कड़े नियम क्यों बनाए हैं, और इसमें शामिल कंपनियों पर बैंकों जैसे कानून क्यों लागू होते हैं? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक ने टाटा संस को अपर लेयर की नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी) की लिस्ट में बरकरार रखा है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि होल्डिंग कंपनी को सूची में शामिल किए जाने से उसके एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन को लौटाने के लंबित आवेदन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। आरबीआई ने आकार आधारित रेगुलेशन रूपरेखा के तहत अपर लेयर की एनबीएफसी की नई लिस्ट जारी की है। इस व्यवस्था के तहत प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण नॉन-बैंकिंग लेंडर्स और कोर इंवेस्टमेंट कंपनियों (सीआईसी) पर अधिक कड़े नियामकीय प्रावधान लागू होते हैं। आरबीआई ने कहा कि लिस्ट में टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड को शामिल किया जाना उसके पंजीकरण रद्द करने के आवेदन के परिणाम को प्रभावित नहीं करेगा। फिलहाल इस आवेदन की जांच की जा रही है। 400 अरब डॉलर के टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस को पहली बार 2022 में अपर लेयर कैटेगिरी की एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत किया गया था।



















