Bank Penalized for Rejecting Loan after Mortgage: एचडीएफसी बैंक को लोन खारिज करने पर 47,500 रुपये का मुआवजा देने का आदेश

बैंकों को लोन आवेदन को मंजूर या खारिज करने का अधिकार होता है, लेकिन यह प्रक्रिया मनमाने तरीके से नहीं होनी चाहिए। हिमाचल प्रदेश में एक मामला सामने आया है जहां उ
बैंकों को लोन आवेदन को मंजूर या खारिज करने का अधिकार होता है, लेकिन यह प्रक्रिया मनमाने तरीके से नहीं होनी चाहिए। हिमाचल प्रदेश में एक मामला सामने आया है जहां उपभोक्ता आयोग ने एचडीएफसी बैंक को एक कारोबारी को 47,500 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
हमीरपुर जिले के आर्चित ट्रेडिंग कंपनी के मालिक तिलक राज सोनी ने सितंबर 2024 में एक नया कमर्शियल स्टोर खोलने के लिए 1 करोड़ 99 लाख 90 हजार रुपये के बिजनेस लोन के लिए आवेदन किया था। सोनी के अनुसार, बैंक अधिकारियों ने उनसे सभी जरूरी दस्तावेज जमा करने और 9 अक्टूबर 2024 को बैंक के पक्ष में मॉर्गेज डीड तैयार करवाने के लिए कहा। बैंक अधिकारियों ने कई बार उनके कंपनी का निरीक्षण किया और वित्तीय जानकारी भी जुटाई। इस दौरान उन्हें आश्वासन दिया गया कि लोन जल्द ही मंजूर कर दिया जाएगा।
हालांकि, सभी औपचारिकताओं के महज 13 दिन बाद, 22 अक्टूबर 2024 को बैंक ने बिना किसी स्पष्ट कारण के लोन आवेदन खारिज कर दिया। हमीरपुर डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि बैंकों को लोन मंजूर या अस्वीकार करने का अधिकार है, लेकिन उन्हें यह प्रक्रिया स्पष्ट और पारदर्शी तरीके से करनी चाहिए। आयोग ने कहा कि जब बैंक ग्राहक से मॉर्गेज डीड बनवाता है और अन्य औपचारिकताएं करता है, तो ग्राहक को लोन मंजूरी की उम्मीद होती है। बिना कारण बताए आवेदन खारिज करना प्रशासनिक मनमानी है।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि एचडीएफसी बैंक द्वारा लोन खारिज किए जाने के बाद उसी दस्तावेजों के आधार पर एक अन्य बैंक ने मात्र 10 दिनों में लोन स्वीकृत कर दिया। इससे यह स्पष्ट होता है कि एचडीएफसी बैंक की प्रक्रिया उचित और निष्पक्ष नहीं थी। सोनी ने बैंक की कार्रवाई के कारण अपने नए कमर्शियल स्टोर का लॉन्च जनवरी 2025 में नहीं कर सके और इसे अप्रैल 2025 तक टालना पड़ा, जिससे उन्हें लगभग 25 लाख रुपये का व्यापारिक नुकसान हुआ।



















