Masterplan to Transform Waste into Wealth: गोबरधन योजना से किसानों और पशुपालकों की किस्मत बदलने की तैयारी

गोबरधन योजना के तहत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने 23,731 करोड़ रुपये के बजट के साथ एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस योजना का उ
गोबरधन योजना के तहत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने 23,731 करोड़ रुपये के बजट के साथ एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस योजना का उद्देश्य कचरे को कमाई में बदलना है। गांवों में किसानों और पशुपालकों से गोबर और कृषि कचरे को इकट्ठा करने के लिए गोबर बैंक बनाए जाएंगे। इन कचरे को एक विशेष प्लांट में बिना ऑक्सीजन के सड़ाकर मीथेन गैस बनाई जाएगी, जिसे कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) कहा जाता है। इसके बाद बचे हुए माल से जैविक खाद का उत्पादन होगा।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत अपनी प्राकृतिक गैस की 50 फीसदी जरूरत विदेशों से खरीदता है। हाल के वैश्विक तनावों के कारण भारत के लिए यह निर्भरता खतरनाक हो गई है। इसलिए, कचरे से सीबीजी बनाकर इस निर्भरता को खत्म करने का मास्टरप्लान तैयार किया गया है।
सरकार ने इस योजना में बाजार के डर को समाप्त करने के लिए नियम बनाए हैं कि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को 2026-27 तक अपनी कुल गैस का 3 फीसदी हिस्सा सीबीजी प्लांट से खरीदना होगा। इसके बाद यह लक्ष्य 4 और 5 फीसदी तक बढ़ाया जाएगा। सीबीजी गैस का रेट 10 साल के लिए फिक्स कर दिया गया है, जिससे उत्पादकों को उनकी कमाई का पता होगा।
सरकार इस योजना के तहत भारी सब्सिडी भी दे रही है, जिससे प्लांट लगाने में मदद मिलेगी। यदि कोई महिला उद्यमी है या पहली बार प्लांट लगा रहा है, तो बैंक से लोन लेने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। सरकार लोन की गारंटी भी लेगी। इस बिजनेस मॉडल की खूबसूरती यह है कि इसमें कुछ भी बेकार नहीं जाता। गैस के बाद जो गाढ़ा तरल या सूखा माल बचता है, वह मिट्टी के लिए संजीवनी है।



















