Nursing Recruitment Controversy: छत्तीसगढ़ सरकार से नर्सिंग भर्ती में पुरुषों को मौका न देने पर जवाब तलब

डिजिटल डेस्क, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में व्याख्याता और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर पुरुष अभ्यर्थियों को शामिल न करने के मामले
डिजिटल डेस्क, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में व्याख्याता और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर पुरुष अभ्यर्थियों को शामिल न करने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। यह मामला तब सामने आया जब तीन साल पहले कोर्ट ने इस संबंध में आदेश जारी किया था, लेकिन उसके बावजूद सरकार ने नियमों में संशोधन नहीं किया। अब कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजी-पीएससी) के सचिव डी. राहुल वेंकट को अवमानना नोटिस जारी कर पांच सप्ताह में जवाब मांगा है। हाई कोर्ट ने 2023 में नर्सिंग कॉलेजों में 100% महिला आरक्षण को असंवैधानिक बताते हुए इसे रद्द कर दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया था कि भर्ती प्रक्रिया में पुरुष अभ्यर्थियों को भी शामिल किया जाए। इसके बावजूद, आरोप है कि सरकार ने नियमों का पालन नहीं किया और 22 जून 2026 को संविदा भर्ती का नया विज्ञापन जारी कर दिया। इस अवहेलना पर कोर्ट ने सरकार से जवाब तलब किया है।
इस विवाद की शुरुआत आठ दिसंबर 2021 को हुई जब पीएससी ने सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में डिमांस्ट्रेटर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर सीधी भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। इस विज्ञापन में केवल महिलाओं को पात्र मानने की बात कही गई थी, जिसे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने इस विज्ञापन को चुनौती देते हुए कहा कि यह नियमों के खिलाफ है और सभी योग्य अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलना चाहिए। अब, जब आयुक्त चिकित्सा शिक्षा ने 22 जून 2026 को सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और डिमांस्ट्रेटर के पदों पर संविदा भर्ती के लिए नया विज्ञापन जारी किया है, तो याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है। यह मामला न केवल नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाता है।


















