Chandipura virus: बारिश के मौसम में चांदीपुरा वायरस का खतरा बढ़ा, जानें लक्षण और डॉक्टर की सलाह

मानसून की बारिश जहां गर्मी से राहत लाती है, वहीं मच्छरों और कीटों के पनपने के कारण कई घातक बीमारियों का जोखिम भी बढ़ जाता है। इनमें से एक चांदीपुरा वायरस (chand
मानसून की बारिश जहां गर्मी से राहत लाती है, वहीं मच्छरों और कीटों के पनपने के कारण कई घातक बीमारियों का जोखिम भी बढ़ जाता है। इनमें से एक चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus) है, जो हर साल बारिश के मौसम में फैलता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस वायरस का सबसे बड़ा खतरा 15 साल से कम उम्र के बच्चों को होता है। हाल ही में गुजरात में चांदीपुरा वायरस ने कहर बरपाया है। 2026 के मानसून सीजन में इस वायरस से 22 बच्चों की मौत की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्यभर में इस वायरस के 184 संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिनमें से 35 मामलों में संक्रमण की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। चांदीपुरा वायरस का नाम महाराष्ट्र के चंद्रपुर शहर के नाम पर रखा गया है और इसकी पहचान सबसे पहले 1965 में हुई थी। यह वायरस गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और पश्चिमी व मध्य भारत के अन्य हिस्सों में भी कहर ढहा चुका है। यह वायरस वायरल संक्रमण के कारण फैलता है।
दिल्ली के शालीमार बाग स्थित फोर्टिस अस्पताल के पीडियाट्रिक्स विभाग के सीनियर डायरेक्टर और यूनिट हेड, डॉ. विवेक जैन ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि चांदीपुरा वायरस संक्रमित सैंड फ्लाई यानी बालू मक्खी के काटने से फैलता है। बारिश के मौसम में गर्म तापमान, अधिक नमी और गंदगी इन कीड़ों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती हैं। डॉ. जैन ने बताया कि मिट्टी के घरों की दरार वाली दीवारें, आसपास जमा कचरा, घरों के पास पशुओं को रखना और पर्याप्त वेक्टर कंट्रोल का अभाव संक्रमण के खतरे को बढ़ाता है। जब तक इन पर्यावरणीय परिस्थितियों में सुधार नहीं होगा, तब तक मौसमी प्रकोप का खतरा बना रह सकता है।



















