WHO warns about cancer risk from blood pressure medication: ब्लड प्रेशर की दवा से कैंसर होने का खतरा? WHO की चेतावनी पर जानिए एक्सपर्ट्स की राय

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिसर्च यूनिट इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च (आईएआरसी) ने हाई बीपी, फंगल इंफेक्शन और ऑर्गन ट्रांसप्लांट में इस्तेमाल होने वाली
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिसर्च यूनिट इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च (आईएआरसी) ने हाई बीपी, फंगल इंफेक्शन और ऑर्गन ट्रांसप्लांट में इस्तेमाल होने वाली दवा को कार्सिनोजेनिक बताया है। यह जानकारी चौंकाने वाली है कि बीमारी को कंट्रोल करने वाली दवा से कैंसर का खतरा हो सकता है। इस रिसर्च में हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड, वोरिकोनाजोल और टैक्रोलिमस का नाम शामिल है। इन दवाओं में ऐसे केमिकल हैं जो इंसानों में कैंसर के पनपने का कारण बन सकते हैं। डब्ल्यूएचओ ने बताया कि यह निर्णय सिर्फ एक स्टडी पर आधारित नहीं है, बल्कि इसमें पूरी दुनिया के एक्सपर्ट्स के शोध और परीक्षणों की समीक्षा की गई है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि धूप में काम करने वाले लोग, जो इन दवाओं का सेवन करते हैं, उनमें स्किन कैंसर का खतरा ज्यादा हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति धूप में अधिक समय बिताता है और इन दवाओं का सेवन करता है, तो उसकी स्किन सेंसिटिव हो जाती है। इससे कैंसर के होने की संभावना बढ़ जाती है। ऑस्ट्रेलिया में धूप के अधिक संपर्क के कारण कैंसर का खतरा अधिक है।
विशेषज्ञों ने बताया कि होंठों का कैंसर भी एक चिंता का विषय है, क्योंकि यह धूप के सीधे संपर्क में आता है। स्किन कैंसर को बेसल सेल कार्सिनोमा कहा जाता है, और मेलोनिमाज से भी कुछ संबंध देखे गए हैं। मरीजों को सलाह दी गई है कि वे खुद से दवा बंद न करें और अपने डॉक्टर से संपर्क करें। यदि स्किन में कोई परिवर्तन दिखाई दे, तो तुरंत डर्माटोलॉजिस्ट को दिखाना चाहिए।
भारत में हाई ब्लड प्रेशर के इलाज में हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड का उपयोग किया जाता है। जिन लोगों को यह दवा दी जाती है, उन्हें विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है, खासकर उन लोगों के लिए जो लंबे समय तक धूप में काम करते हैं। वोरिकोनाजोल के उपयोग को लेकर भी सावधानी बरतनी चाहिए। डॉक्टरों का कहना है कि इन दवाओं का सेवन करने वाले मरीजों को घबराने की जरूरत नहीं है और उन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद नहीं करनी चाहिए।



















