Rising Ozone Pollution: गर्मी में ओजोन प्रदूषण का खतरा बढ़ा

वायु प्रदूषण की चर्चा में आमतौर पर pm2.5 और pm10 का जिक्र होता है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत के कई शहरों में ग्राउंड लेवल ओजोन एक तेजी से उभरता हुआ प
वायु प्रदूषण की चर्चा में आमतौर पर PM2.5 और PM10 का जिक्र होता है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत के कई शहरों में ग्राउंड लेवल ओजोन एक तेजी से उभरता हुआ प्रदूषक बनता जा रहा है। यह प्रदूषक सीधे फैक्ट्रियों या वाहनों से नहीं निकलता, बल्कि तेज धूप, गर्मी और हवा में मौजूद प्रदूषकों की रासायनिक प्रतिक्रिया से बनता है। गर्मियों के दौरान, विशेषकर दोपहर के समय, इसका स्तर अधिकतम होता है।
ओजोन के दो प्रकार होते हैं। ऊपरी वायुमंडल में मौजूद ओजोन सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से सुरक्षा प्रदान करती है, जबकि ग्राउंड लेवल ओजोन एक हानिकारक प्रदूषक है। यह तब बनती है जब वाहनों, उद्योगों और बिजलीघरों से निकलने वाले नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs) तेज धूप और उच्च तापमान में आपस में प्रतिक्रिया करते हैं।
भारत के उष्णकटिबंधीय जलवायु में तेज धूप और उच्च तापमान ओजोन निर्माण की प्रक्रिया को तेज कर देते हैं। इसलिए, अप्रैल से जून के बीच और दोपहर के समय ओजोन का स्तर अधिक होता है। जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती गर्मी इस समस्या को और गंभीर बना सकती है। अब यह समस्या केवल दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि पुणे, हैदराबाद, बेंगलुरु, चंडीगढ़, जयपुर और अहमदाबाद जैसे शहरों में भी इसका प्रभाव बढ़ रहा है।
ग्राउंड लेवल ओजोन स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। इसके संपर्क में आने से सांस लेने में कठिनाई, खांसी, गले और आंखों में जलन, और अस्थमा के मरीजों में अटैक का खतरा बढ़ सकता है। WHO भी ओजोन को मानव स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण प्रदूषक मानता है। इसके अलावा, ओजोन फसलों की उत्पादकता को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे कृषि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।


















