New Building Policy in UP: यूपी के औद्योगिक क्षेत्रों में भवन निर्माण के लिए नई नीति, 100 वर्गमीटर में क्लीनिक संभव

मनोज त्रिपाठी, लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के क्षेत्र में भवन निर्माण को लेकर एक नई नीति लागू करने जा रही है, जिसका नाम एकीकृत
मनोज त्रिपाठी, लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के क्षेत्र में भवन निर्माण को लेकर एक नई नीति लागू करने जा रही है, जिसका नाम एकीकृत मॉडल भवन विनिमय-2026 रखा गया है। यह नीति औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के क्षेत्र में भवन निर्माण में एकरूपता लाने के उद्देश्य से बनाई गई है। इस नीति के अंतर्गत अब औद्योगिक क्षेत्रों में न्यूनतम 100 वर्गमीटर भूखंड पर ओपीडी क्लीनिक, डिस्पेंसरी, डायग्नोस्टिक सेंटर, पैथोलाजी लैब और पशु चिकित्सा क्लीनिक का निर्माण किया जा सकेगा। इसके साथ ही नर्सिंग होम और मातृत्व व लघु चिकित्सालयों की क्षमता 50 बेड तक सीमित रहेगी। 50 से अधिक बेड वाले चिकित्सालयों के लिए अलग मानदंड निर्धारित किए गए हैं। इस नई नीति का अंतिम मसौदा एक पांच सदस्यीय समिति द्वारा तैयार किया गया है, जो औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के क्षेत्र में भवन निर्माण के नियमों को एक समान बनाने के लिए गठित की गई थी।
नई नीति के अनुसार, उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण, नोएडा और ग्रेटर नोएडा, गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण, बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण और सथरिया औद्योगिक विकास प्राधिकरण के क्षेत्र में भवन निर्माण के नियमों में एकरूपता लाई जाएगी। मसौदे के अनुसार आवासीय परियोजनाओं के लिए न्यूनतम नौ मीटर चौड़ी सड़क और ग्रुप हाउसिंग व औद्योगिक परियोजनाओं के लिए न्यूनतम 12 मीटर चौड़ी सड़क की शर्त रखी गई है। अग्निशामक मानकों के अनुसार भवनों का निर्माण अधिकतम फ्लोर एरिया में किया जा सकेगा। इसके अलावा, चार एकड़ क्षेत्रफल वाले औद्योगिक भूखंडों में श्रमिकों के लिए डारमेट्री का निर्माण अनिवार्य होगा।
















