Innovative Leather from Banana Peels: केले के छिलकों से बना नया लेदर

दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज के छात्रों ने एक अनोखी तकनीक विकसित की है, जिसके माध्यम से उन्होंने केले के छिलकों से प्लांट-बेस्ड लेदर तैयार किया है। यह ले
दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज के छात्रों ने एक अनोखी तकनीक विकसित की है, जिसके माध्यम से उन्होंने केले के छिलकों से प्लांट-बेस्ड लेदर तैयार किया है। यह लेदर न केवल जानवरों की खाल का विकल्प है, बल्कि यह खाद्य अपशिष्ट और प्रदूषण की समस्या का समाधान भी पेश करता है। छात्रों का मानना है कि केले के छिलके, जिन्हें पहले कचरा समझा जाता था, अब एक नई उम्मीद बनकर उभरे हैं। इस प्रोजेक्ट पर काम करने में छात्रों को एक साल का समय लगा, जिसमें उन्होंने विभिन्न फलों के छिलकों का परीक्षण किया। संतरा, आम, पाइनएप्पल और नारियल जैसे फलों के छिलकों को आजमाने के बाद, अंततः उन्हें केले का छिलका सबसे उपयुक्त लगा। छात्रों ने बताया कि यह प्रक्रिया आसान नहीं थी, लेकिन कई प्रयासों के बाद वे इस लक्ष्य को हासिल करने में सफल रहे। उन्होंने इस नए लेदर को 'सहर' नाम दिया है, जो टिकाऊ और इको-फ्रेंडली विकल्प के रूप में उभरा है।
इस लेदर को बनाने की प्रक्रिया में फलों के बचे हुए हिस्सों को प्रोसेस किया जाता है, जिससे एक मजबूत और लचीली शीट तैयार होती है। यह सामग्री दिखने और महसूस करने में असली लेदर के समान होती है। इससे बैग, वॉलेट, डायरी कवर और फैशन एक्सेसरीज़ जैसे उत्पाद बनाए जा सकते हैं। हालांकि, छात्र अभी बड़े उत्पादों जैसे जैकेट और जूतों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, बल्कि छोटे उत्पादों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इस पहल ने न केवल छात्रों की इनोवेशन क्षमता को उजागर किया है, बल्कि यह पर्यावरण के प्रति उनकी सोच को भी नई दिशा दी है।



















