ZSI Compiles National Butterfly and Moth List: भारत की तितलियों और पतंगों की पहली राष्ट्रीय सूची तैयार

भारत ने जैव विविधता संरक्षण और वर्गीकरण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन कार्यरत भार
भारत ने जैव विविधता संरक्षण और वर्गीकरण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन कार्यरत भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) ने हाल ही में भारत की तितलियों और पतंगों की पहली व्यापक राष्ट्रीय सूची तैयार करने की घोषणा की है। इस सूची को तैयार करने में 12 वर्षों का समय लगा है, जिसमें जेडएसआई के वैज्ञानिकों ने व्यापक फील्ड सर्वेक्षण, संग्रहालयों में संरक्षित नमूनों का अध्ययन और उपलब्ध वैज्ञानिक साहित्य का गहन सत्यापन किया। जेडएसआई की निदेशक डॉ. धृति बनर्जी ने बताया कि यह परियोजना डॉ. नवनीत सिंह और डॉ. राहुल जोशी के नेतृत्व में संचालित की गई थी। इस परियोजना का अंतिम और निर्णायक खंड प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका जूटाक्सा में प्रकाशित हुआ है। इस सूची में भारत में तितलियों और पतंगों की कुल 13,703 प्रजातियां, 3,705 वंश, 240 उपकुल, 102 कुल और 31 महाकुल दर्ज किए गए हैं। यह संख्या दुनिया में ज्ञात कुल तितली एवं पतंगा प्रजातियों का लगभग 8.25 प्रतिशत है। इस सूची के अनुसार, अंतिम प्रकाशन में शेष 1,689 प्रजातियों का भी वर्गीकरण पूरा किया गया है।
इस परियोजना की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जियोमेट्रोआइडिया महाकुल के पतंगों की विस्तृत सूची है। भारत में इस महाकुल की 2,205 प्रजातियां, 479 वंश, 13 उपकुल और चार कुल पाए गए हैं, जो विश्व की ज्ञात प्रजातियों का लगभग 8.80 प्रतिशत हैं। इनमें जियोमेट्रिडी कुल सबसे बड़ा है, जिसमें 2,100 प्रजातियां और 445 वंश शामिल हैं। इसके अलावा, यूरानिडी में 95 प्रजातियां, एपिकोपिडी में नौ और स्यूडोबिस्टोनिडी में एक प्रजाति दर्ज की गई है। तितलियां और पतंगे पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये परागण, जैविक अपघटन और खाद्य श्रृंखला का अहम हिस्सा हैं। पक्षियों, चमगादड़ों तथा अन्य कीटभक्षी जीवों के लिए ये प्रमुख भोजन स्रोत हैं। कई प्रजातियां कृषि और वानिकी प्रबंधन को भी सीधे प्रभावित करती हैं।



















