Hanging glaciers in Uttarakhand: उत्तराखंड के अलकनंदा बेसिन में 219 हैंगिंग ग्लेशियरों की पहचान, बड़े खतरे की आहट

उत्तराखंड के अलकनंदा बेसिन में हाल ही में 219 हैंगिंग ग्लेशियरों की पहचान की गई है, जो भविष्य में हिमस्खलन और बर्फ-चट्टान टूटने की घटनाओं का कारण बन सकते हैं। य
उत्तराखंड के अलकनंदा बेसिन में हाल ही में 219 हैंगिंग ग्लेशियरों की पहचान की गई है, जो भविष्य में हिमस्खलन और बर्फ-चट्टान टूटने की घटनाओं का कारण बन सकते हैं। यह अध्ययन भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु के शोधकर्ताओं ने किया है, जिसमें उन्होंने सेंटिनल-2 उपग्रह चित्रों और डिजिटल एलिवेशन मॉडल का उपयोग किया। इन ग्लेशियरों का कुल क्षेत्रफल लगभग 71.7 वर्ग किमी है और इनमें से 0.74 घन किमी बर्फ सबसे अस्थिर मानी गई है। ये ग्लेशियर औसतन 33 डिग्री की ढलान पर स्थित हैं और उनकी ऊंचाई 4,018 से 6,759 मीटर के बीच है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि बदरीनाथ-माणा क्षेत्र सबसे अधिक संवेदनशील है। यदि बड़े हिमखंड टूटते हैं, तो बर्फ और मलबे की धारा की ऊंचाई 50 मीटर से अधिक हो सकती है, जिससे नीचे स्थित सड़कें और अन्य ढांचे प्रभावित हो सकते हैं।
इस अध्ययन ने यह स्पष्ट किया है कि लगभग 55 प्रतिशत हैंगिंग ग्लेशियर मुख्य ग्लेशियरों के ऊपर लटके हुए हैं, इसलिए इनसे आबादी को कम खतरा है। लेकिन जो ग्लेशियर सीधे घाटियों या मानव गतिविधियों वाले क्षेत्रों के ऊपर हैं, उनकी निगरानी आवश्यक है। वैज्ञानिकों का मानना है कि मानव गतिविधियों के बढ़ने से खतरा और भी बढ़ रहा है। वर्ष 2000 में संभावित जोखिम क्षेत्र में निर्मित क्षेत्र लगभग 8,000 वर्ग मीटर था, जो 2030 तक बढ़कर 1.52 लाख वर्ग मीटर हो सकता है। इसी अवधि में संभावित रूप से प्रभावित आबादी भी बढ़ सकती है, जिससे भविष्य में किसी बड़े बर्फ-टूटने की घटना का प्रभाव अधिक लोगों पर पड़ सकता है।



















