Innovative Water Testing Device: IIT Guwahati ने विकसित किया किफायती जल परीक्षण उपकरण 'ई-आइ'

आईआईटी गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने एक नया और किफायती पोर्टेबल ऑप्टिकल सेंसिंग उपकरण 'ई-आइ' (इलेक्ट्रानिक आई) विकसित किया है, जो पानी में मौजूद भारी धातुओं जैसे आर
आईआईटी गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने एक नया और किफायती पोर्टेबल ऑप्टिकल सेंसिंग उपकरण 'ई-आइ' (इलेक्ट्रानिक आई) विकसित किया है, जो पानी में मौजूद भारी धातुओं जैसे आर्सेनिक, लेड, और क्रोमियम के साथ-साथ अन्य विषैले पदार्थों का पता लगाने में सक्षम है। इस उपकरण की लागत लगभग 3,500 रुपये है और प्रति सैंपल टेस्टिंग का खर्च केवल दो रुपये आता है। इस नवाचार का उद्देश्य केंद्र सरकार के 'जल जीवन मिशन' के तहत पानी की गुणवत्ता की निगरानी करना है, जिससे लोगों को सुरक्षित और स्वच्छ जल उपलब्ध हो सके। 'ई-आइ' उपकरण की विशेषता यह है कि यह मौके पर ही जहरीले पदार्थों का पता लगाकर सटीक नतीजे प्रदान करता है और प्राप्त डेटा को वायरलेस तरीके से जल शोधन केंद्र तक भेजता है। इस शोध के परिणामों को आइईईई सेंसर्स जर्नल में प्रकाशित किया गया है, जो इस तकनीक की विश्वसनीयता को दर्शाता है।
इस शोध को IIT गुवाहाटी के प्रोफेसर तापस के. मंडल और प्रोफेसर हर्षल बी. नेमाडे ने अपने रिसर्च स्कालर श्रीकांत कश्यप, स्मृति सचान और नेहा माजी के साथ मिलकर लिखा है। इसके अलावा, आइआइटी-भुवनेश्वर की मैत्रयी भुइयां और रामकृष्ण मिशन रेजिडेंशियल कालेज, कोलकाता के हुमायूं कबीर भी इस रिसर्च में शामिल रहे हैं। प्रोफेसर मंडल ने बताया कि यह उपकरण आर्सेनिक, लेड, आयरन, क्रोमियम, फ्लोराइड और ई कोलाई बैक्टीरिया जैसे हानिकारक पदार्थों का सफलतापूर्वक पता लगाने में सक्षम है। वहीं, प्रोफेसर नेमाडे ने कहा कि 'ई-आइ' जल शक्ति मंत्रालय के तहत आने वाली एजेंसियों को पानी की गुणवत्ता की निगरानी में मदद कर सकता है, जिससे जल प्रदूषण की समस्या को नियंत्रित किया जा सके।



















