Geothermal Project in Uttarakhand: उत्तराखंड में पहली जियोथर्मल परियोजना ने पकड़ी रफ्तार, आइसलैंड की कंपनी ने सौंपा ब्लूप्रिंट

उत्तराखंड में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई शुरुआत करते हुए, पहली जियोथर्मल परियोजना ने अब गति पकड़ ली है। यह परियोजना उत्तरकाशी के गंगनानी क्षेत्र में प्रस
उत्तराखंड में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई शुरुआत करते हुए, पहली जियोथर्मल परियोजना ने अब गति पकड़ ली है। यह परियोजना उत्तरकाशी के गंगनानी क्षेत्र में प्रस्तावित की गई है, जहां आइसलैंड की जियोथर्मल इंजीनियरिंग कंपनी वर्किस ने उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) को इनीशियल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (ब्लूप्रिंट) सौंप दी है। इस रिपोर्ट के माध्यम से परियोजना की विस्तृत भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण, परीक्षण ड्रिलिंग और डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी। यूजेवीएनएल ने डीपीआर के लिए राज्य सरकार से लगभग तीन करोड़ रुपये की स्वीकृति मांगी है। इस परियोजना के पहले चरण में दस मेगावाट क्षमता का जियोथर्मल विद्युत संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। भविष्य में, यदि भूगर्भीय परीक्षणों के सकारात्मक परिणाम मिलते हैं, तो इस संयंत्र की क्षमता को बढ़ाया जाएगा।
इस परियोजना का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि राज्य सरकार ने वर्ष 2025 में जियोथर्मल ऊर्जा नीति लागू करने के बाद इसे यूजेवीएनएल को सौंपा था। इसके अलावा, जनवरी 2025 में उत्तराखंड सरकार और आइसलैंड की कंपनी वर्किस के बीच भू-तापीय ऊर्जा विकास के लिए एक समझौता भी हुआ था। किसी भी जियोथर्मल परियोजना की इनीशियल प्रोजेक्ट रिपोर्ट परियोजना का पहला तकनीकी ब्लूप्रिंट होती है, जिसमें भू-वैज्ञानिक, भू-भौतिकीय और भू-रासायनिक आंकड़ों का विश्लेषण किया जाता है। इसके साथ ही, संभावित ड्रिलिंग स्थलों की पहचान, भूमिगत तापीय भंडार का प्रारंभिक आकलन, बिजली उत्पादन की संभावना, तकनीकी एवं पर्यावरणीय जोखिम और आगे की कार्ययोजना तैयार की जाती है।



















