Global Branding of Uttarkashi's Red Rice: उत्तरकाशी के 'लाल चावल' की वैश्विक ब्रांडिंग, ODOP से मिली नई पहचान

उत्तरकाशी जिला, जो हिमालय की गोद में बसा हुआ है, अब केवल चारधाम यात्रा और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ही नहीं, बल्कि यहां की विशेषता 'लाल चावल' के लिए भी जाना जा र
उत्तरकाशी जिला, जो हिमालय की गोद में बसा हुआ है, अब केवल चारधाम यात्रा और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ही नहीं, बल्कि यहां की विशेषता 'लाल चावल' के लिए भी जाना जा रहा है। यह चावल न केवल भारत में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी पहचान बना रहा है। उत्तराखंड राज्य की कृषि विरासत में लाल चावल एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। राज्य सरकार ने इसे 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' योजना के तहत उत्तरकाशी जिले का प्रमुख उत्पाद घोषित किया है। इसके औषधीय गुणों और पोषण तत्वों जैसे जिंक, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स के कारण लाल चावल ने राष्ट्रीय स्तर पर 'ODOP अवार्ड्स' में दूसरा स्थान प्राप्त किया है, जिससे राज्य का मान बढ़ा है। इसके साथ ही, जीआई टैग ने इसकी भौगोलिक पहचान को और भी मजबूत किया है।
उत्तरकाशी के पुरोला, मोरी, नौगांव और रवांई घाटी में पारंपरिक रूप से उगाए जाने वाले लाल धान की खेती अब वैज्ञानिक और व्यावसायिक दृष्टिकोण से की जा रही है। पहले, यह चावल केवल सीमित क्षेत्रों में उगाया जाता था, लेकिन अब इसे भटवाड़ी, डुंडा और चिन्यालीसौड़ जैसे अन्य ब्लॉकों में भी बड़े पैमाने पर उगाया जा रहा है। राज्य के कृषि और उद्यान विभाग द्वारा किसानों को उन्नत बीज, जैविक खाद और कीट-प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा, 'हाउस ऑफ हिमालयाज' के माध्यम से लाल चावल को आकर्षक पैकेजिंग में बड़े सुपरमार्केट्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर बेचा जा रहा है। क्लस्टर स्तर पर आधुनिक मिनी राइस मिलें और प्रोसेसिंग इकाइयां स्थापित की गई हैं, जिससे किसानों की मेहनत और लागत को कम किया जा सके।



















