Toxic Air Crisis: दिल्ली में टीबी मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रहा पीएम 2.5

दिल्ली की प्रदूषित हवा अब टीबी मरीजों के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। हाल ही में किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि जिन टीबी मरीजों का इलाज
दिल्ली की प्रदूषित हवा अब टीबी मरीजों के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। हाल ही में किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि जिन टीबी मरीजों का इलाज दिल्ली में सितंबर 2022 से अगस्त 2023 के बीच शुरू हुआ, उनमें से जो मरीज अधिक मात्रा में वायु प्रदूषण यानी पीएम2.5 के संपर्क में रहे, उनके लिए इलाज के दौरान मौत का खतरा काफी बढ़ गया है। इस अध्ययन में 61,925 वयस्क मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है, जो अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के केंद्रीय टीबी डिवीजन के सहयोग से किया गया। इस शोध में बोस्टन मेडिकल सेंटर, बोस्टन यूनिवर्सिटी, कॉर्नेल यूनिवर्सिटी, और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के शोधकर्ताओं ने भी भाग लिया। अध्ययन में पाया गया कि पीएम2.5 के संपर्क में रहने वाले मरीजों में मौत का खतरा लगभग तीन प्रतिशत अधिक है। यह शोध भारत में इस विषय पर किया गया पहला बड़ा अध्ययन है, जिसमें राष्ट्रीय टीबी डेटाबेस निक्षय में दर्ज मरीजों की जानकारी को सैटेलाइट आधारित पीएम2.5 प्रदूषण आंकड़ों से तुलना की गई। पीएम2.5 हवा में मौजूद सूक्ष्म कण होते हैं, जो फेफड़ों में गहराई तक पहुंच सकते हैं और रक्त में भी मिल सकते हैं। इस अध्ययन के निष्कर्षों से यह स्पष्ट होता है कि प्रदूषण का टीबी मरीजों पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में उम्र, लिंग, एचआईवी संक्रमण, डायबिटीज, पोषण की स्थिति, धूम्रपान, शराब का सेवन, सरकारी या निजी अस्पताल में इलाज और फेफड़ों की टीबी जैसे विभिन्न कारकों को भी ध्यान में रखा। इन सभी कारकों को ध्यान में रखने के बाद भी वायु प्रदूषण और मौत के जोखिम के बीच एक मजबूत संबंध बना रहा। हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि यह एक ऑब्जर्वेशनल स्टडी है, इसलिए यह साबित नहीं होता कि प्रदूषण सीधे तौर पर मौत का कारण बना। फिर भी, यह संबंध वैज्ञानिक रूप से संभव है और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।



















