Unique Geological Wonder: कावड़िया पहाड़ पर हल्की सी चोट से गूंज उठते हैं करोड़ों साल पुराने पत्थर

मध्य प्रदेश के देवास जिले में स्थित कावड़िया पहाड़ एक अद्वितीय भूगर्भीय संरचना है, जहां करोड़ों वर्ष पुराने पत्थर हल्की चोट पर धातु जैसी गूंज उत्पन्न करते हैं।
मध्य प्रदेश के देवास जिले में स्थित कावड़िया पहाड़ एक अद्वितीय भूगर्भीय संरचना है, जहां करोड़ों वर्ष पुराने पत्थर हल्की चोट पर धातु जैसी गूंज उत्पन्न करते हैं। यह स्थल उदयनगर वन क्षेत्र में स्थित है और यहां के पत्थर विशेष रूप से काले बेसाल्ट के बने हुए हैं। जब इन पत्थरों को हल्के से टकराया जाता है, तो एक घंटी जैसी आवाज सुनाई देती है, जो पर्यटकों को आकर्षित करती है। भूगर्भ विशेषज्ञों के अनुसार, यह क्षेत्र कालमनर बेसाल्ट की दुर्लभ संरचना का उदाहरण है, जो ज्वालामुखी गतिविधियों के परिणामस्वरूप बना है। यहां के पत्थरों की बनावट इतनी ठोस और सघन है कि उनमें मौजूद प्राकृतिक संरचना उन्हें कंपन करने योग्य बनाती है। हालांकि, इस ध्वनि के पीछे का विज्ञान अभी तक पूरी तरह से समझा नहीं गया है। कावड़िया पहाड़ पर केवल कुछ विशेष आकार और बनावट वाले पत्थर ही यह ध्वनि उत्पन्न करते हैं। ग्राम पोटला के निवासी अरुण भास्कर का कहना है कि इन पत्थरों पर हल्की टक्कर से नुकसान नहीं होता, लेकिन तेज चोट के निशान दिखाई देते हैं। इस क्षेत्र में ऐसे कई पहाड़ हैं, लेकिन कावड़िया पहाड़ की विशेषता इसे अन्य स्थानों से अलग बनाती है।
कावड़िया पहाड़ का महत्व केवल भूगर्भीय दृष्टि से नहीं है, बल्कि यह स्थानीय लोकमान्यता से भी जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि महाबली भीम ने एक रात में मां नर्मदा का वेग रोकने के लिए इन पत्थरों से बांध बनाने का प्रयास किया था। एक अन्य जनश्रुति के अनुसार, पांडव इन्हें कांवड़ में भरकर लाए थे, जिससे इसका नाम कावड़िया पहाड़ पड़ा। इस प्रकार, यह स्थल प्रकृति, विज्ञान और लोकविश्वास का अनूठा संगम है। हालांकि, इस स्थल को अभी तक अपेक्षित पहचान और सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। यहां पहुंचने का रास्ता कठिन है और दिशा-सूचक बोर्ड, पर्यटक सुविधाएं तथा संरक्षण की व्यवस्था भी सीमित हैं।


















