Genome Sequencing of Arhar Dal: अरहर दाल की जीनोम सीक्वेंसिंग से बढ़ेगा प्रोटीन उत्पादन

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के वैज्ञानिकों ने पहली बार अरहर (तूर) दाल की पूरी जीनोम सीक्वेंसिंग की है, जिससे इसके डीएनए का विस्तृत लेखा-जोखा तैयार किया
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के वैज्ञानिकों ने पहली बार अरहर (तूर) दाल की पूरी जीनोम सीक्वेंसिंग की है, जिससे इसके डीएनए का विस्तृत लेखा-जोखा तैयार किया गया है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि से जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने के लिए अधिक पोषणयुक्त और अधिक उपज देने वाली नई किस्मों के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। यह शोध न केवल किसानों के लिए फसल उत्पादन की लागत को कम करेगा, बल्कि उन्हें फसल बीमारियों से भी राहत प्रदान करेगा। इसके अलावा, खाद और कीटनाशकों का उपयोग भी घटेगा, जिससे कम रकबे में अधिक उत्पादन संभव होगा। उपभोक्ताओं को भी अधिक पौष्टिक, किफायती और जल्दी पकने वाली दालें उपलब्ध होंगी, जिससे देश में दाल उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी आएगी।
दिल्ली स्थित आइसीएआर-नेशनल इंस्टीट्यूट फार प्लांट बायोटेक्नोलाजी (एनआइपीबी) में 2011 से चल रहे इस शोध में वैज्ञानिकों ने पहली बार बिना किसी अंतराल के अरहर के पूरे जीनोम का अध्ययन किया है। इस शोध की रिपोर्ट इस वर्ष अप्रैल में वैश्विक वैज्ञानिक डाटाबेस में अपलोड की गई है, और एनसीबीआइ ने इस जीनोम असेंबली को वैश्विक संदर्भ के रूप में मान्यता दी है। इसका अर्थ यह है कि विश्व स्तर पर दाल पर होने वाले शोध में एनसीबीआइ की रिपोर्ट को आधार माना जाएगा। इस शोध का नेतृत्व प्रोफेसर नागेंद्र के. सिंह ने किया है, जिन्होंने बताया कि जीनोम किसी भी जीव का पूरा आनुवंशिक खाका होता है।



















